Todays message - 06.05.2014

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जगत है चलायमान ,
बहती नदी के समान ,
पार कर जाओ इसे तैरकर ,
इस पर बना नहीं सकते घर।

जो कुछ है हमारे भीतर - बाहर ,
दीखता - सा दुखकर - सुखकर ,
वो है हमारे कर्मों का फल।
कर्म है अटल।

~ हरिवंश राय बच्चन

Replies (2)

Nice Lines..yes

Thanks for share


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