जितनी देर आदमी हंसता है उतनी देर
उसके मन में मैल नहीं रहता। उतनी देर
उसका कोई शत्रु नहीं रहता।
ईर्ष्या ,द्वेष, घृणा के भाव नहीं रहते।
जितनी देर आदमी हंसता है उतनी देर
उसके मन में मैल नहीं रहता। उतनी देर
उसका कोई शत्रु नहीं रहता।
ईर्ष्या ,द्वेष, घृणा के भाव नहीं रहते।